ए आई से तेंदुआ की फोटो बनाकर क्षेत्र में फैलाई दहशत, वन विभाग की उड़ी नींद ।

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भारत लीक्स, आगरा (एत्मादपुर)। थाना एत्मादपुर क्षेत्र के गांव घड़ी जस्सा में 30 तारीख को 27 वर्षीय युवक गुड्डू पर किसी अज्ञात जानवर के हमले की सूचना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। शुरुआती अनुमान तेंदुए या बाघ जैसे किसी खतरनाक वन्य जीव का लगाया गया, जिसके बाद वन विभाग और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए।
गश्त करते देखे गए वन विभाग के अधिकारी
घटना के बाद वन विभाग की टीम ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए लगातार चार दिनों तक क्षेत्र में सघन गश्त और सर्च ऑपरेशन चलाया। जंगल, खेत, नहर किनारे और गांव की सीमा से सटे इलाकों में अधिकारियों और कर्मचारियों ने पैदल व वाहन से निगरानी की, लेकिन किसी भी वन्य जीव की स्पष्ट मौजूदगी सामने नहीं आई। इसके बावजूद ग्रामीणों में डर बना रहा और हर हलचल को संदिग्ध नजर से देखा जाने लगा।
दो दिन पहले भी हुई तेंदुआ की फ़ोटो वारयल
इसी बीच घड़ी जैसा के रहने वाले रामकुमार के घर के बाहर लगे कैमरे में एक जानवर की फोटो दिखाई दी इसके बाद यह घटना की तरह क्षेत्र में फैल गई कुछ देर बाद एक सोशल मीडिया पर एक फोटो और वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें पेड़ के पास तेंदुए जैसा जानवर दिखाई दे रहा था। वायरल होते ही पूरे क्षेत्र में फिर से हड़कंप मच गया। हालांकि जब विशेषज्ञों और अधिकारियों ने फोटो की बारीकी से जांच की, तो इसके AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनाए जाने की आशंका जताई गई। माना जा रहा है कि इसी वायरल फोटो के कारण प्रशासन और ग्रामीणों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ी। जिसके चलते वन विभाग की टीम को पकड़ने के लिए  दो दिन से मशक्कत करनी पड़ रही थी और एक पिंजरा लगाकर उसे पकड़ने के प्रयास करने पड़े सर्दी रातों में वही टीम के होश उड़ गए थे।
मौके पर मौजूद रहे छेत्रीय  विधायक
मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्री विधायक धर्मपाल सिंह भी गांव घड़ी जस्सा पहुंचे। उन्होंने मौके पर मौजूद वन विभाग और पुलिस अधिकारियों से पूरी जानकारी ली और ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की। विधायक ने कहा कि अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के साथ सहयोग करें।
बकरी के लिए बनाया गया अलग कंपार्टमेंट
एहतियातन वन विभाग द्वारा एक पिंजरा लगाया गया, जिसमें अलग से कंपार्टमेंट बनाकर बकरी रखी गई, ताकि अगर कोई वन्य जीव आता है तो बकरी को नुकसान न पहुंचे और जानवर को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जा सके। इसके साथ ही SOS की टीम भी मौके पर मौजूद रही और पूरी रात निगरानी की व्यवस्था की गई।
 दहशत, मेहनत और अफवाह ।
रात भर की निगरानी और कई दिनों की गश्त के बावजूद किसी भी वन्य जीव की पुष्टि नहीं हो सकी। अब प्रशासन का मानना है कि यह पूरा मामला AI से बनी वायरल फोटो और अफवाहों की वजह से तूल पकड़ गया। इससे न सिर्फ सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, बल्कि ग्रामीणों में भी बेवजह डर और चिंता का माहौल बन गया।
डीएफओ राजेश कुमार ने साफ अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी फोटो या वीडियो को बिना पुष्टि साझा न करें। यदि वास्तव में कोई संदिग्ध वन्य जीव दिखाई दे, तो उसकी सूचना सीधे पुलिस या वन विभाग को दें, ताकि सही और समय पर कार्रवाई की जा सके। यही फोटो की जांच की जा रही है फोटो वायरल करने वाले के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी ।

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