भारत लीक्स, आगरा। महात्मा गांधी की 156वीं जयंती पर इस बार आगरा का ऐतिहासिक गांधी आश्रम एक नए रूप में दिखा। दशकों से उपेक्षा और जर्जर हालात में पड़ा यह स्थल अब रोशनी और वॉल पेंटिंग से जगमगा रहा है। क्षेत्रीय पार्षद पति बॉबी भाई उर्फ श्याम अग्रवाल ने करीब 10 साल बाद गांधी आश्रम का कायाकल्प कराकर इसे संजीवनी दी है।
गांधी जी का पड़ाव और उद्देश्यl
गांधी जी स्वतंत्रता संग्राम के दौर में आगरा आए थे। यमुना किनारे स्थित इस आश्रम में ही उन्होंने प्रवास किया था।यहां रुकने का मुख्य उद्देश्य स्थानीय जनता को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ना और समाज में छुआछूत, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता का संदेश फैलाना था।
आश्रम परिसर में स्थित बड़े शीतलताब पेड़ के नीचे गांधी जी अक्सर बैठते थे। यहीं पर बना उनका चबूतरा आज भी ऐतिहासिक गवाह है।इसी स्थान पर बैठकर उन्होंने सत्य, अहिंसा और स्वदेशी की राह समझाई थी।
उन्होंने ग्रामीणों से कहा था कि “स्वराज सिर्फ अंग्रेज़ों से आज़ादी नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता और सद्भाव से भी मिलेगा।”
अब बदला रूप
वर्षों की बदहाली के बाद अब गांधी आश्रम का कायाकल्प हुआ है।
आश्रम परिसर की दीवारों पर गांधीजी के विचारों वाली वॉल पेंटिंग बनाई गई हैं।
रात को पूरा आश्रम आकर्षक लाइटिंग से चमक उठता है।
परिसर की दीवारें, चारदीवारी और प्रवेश द्वार का सौंदर्यकरण कराया गया है।
स्थानीय लोगों ने कहा कि वर्षों बाद गांधी आश्रम को ऐसा रूप मिला है जो शहरवासियों के लिए गर्व की बात है।

पार्षद का बयान
प्रियंका अग्रवाल ने कहा — “गांधी जी हमारे राष्ट्रपिता हैं। यह स्थान जहां उन्होंने प्रवास कर लोगों को प्रेरित किया था, उसका सम्मान और सौंदर्यकरण करना हमारी जिम्मेदारी है। अब यह जगह युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगी।
गांधी जयंती पर यह कायाकल्प न सिर्फ बापू की यादों को ताज़ा करता है, बल्कि उनकी शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का काम भी करेगा।
गांधी जयंती पर यह कायाकल्प न सिर्फ बापू की यादों को ताज़ा करता है, बल्कि उनकी शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का काम भी करेगा।
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