भारत लीक्स,आगरा। देश की आज़ादी की लड़ाई में आगरा का भी एक ऐसा अध्याय है जो इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। यह वही नगरी है जहाँ शहीद-ए-आज़म भगत सिंह ने कुछ समय के लिए शरण ली और ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती देने वाली रणनीतियाँ बनाई।
सांडर्स हत्याकांड और असेंबली बम कांड के बाद भगत सिंह और उनके साथी अंग्रेज़ी हुकूमत की पकड़ से बचते हुए आगरा पहुँचे। बेलनगंज क्षेत्र का हाउस नंबर 40 उस दौर में उनका गुप्त अड्डा बना। कहते हैं कि इसी घर की चारदीवारी के भीतर बैठकर भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी साथियों ने हिंदुस्तान की आज़ादी के लिए अगली योजनाओं पर मंथन किया।
भेष बदलकर आम नागरिक की तरह रह रहे भगत सिंह ने यहाँ दिन-रात गुप्त बैठकें कीं। शहर के इस शांत से कोने में उन्होंने और उनके साथियों ने वह ज्वाला प्रज्वलित की, जिसने पूरे देश में स्वतंत्रता संग्राम की आग भड़काई।
स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि वह मकान आज भी क्रांतिकारी दौर की गवाही देता है। हालांकि अब इमारत के स्वरूप में बदलाव हो चुका है, लेकिन उसकी दीवारें मानो आज भी उस दौर की फुसफुसाहट सुनाती हैं जब भगत सिंह जैसे वीर सपूत स्वतंत्र भारत का सपना बुन रहे थे।

आगरा का यह अध्याय केवल एक ठिकाना नहीं, बल्कि उस संकल्प का प्रतीक है जिसने लाखों युवाओं को आज़ादी की राह पर चलने की प्रेरणा दी। भगत सिंह का बलिदान आज भी हर भारतीय को यह याद दिलाता है कि मातृभूमि के लिए जिया और मरा जाने वाला जीवन ही सच्चा जीवन है।
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