पेड़ कटे, जेसीबी चली, सरकारी जमीन बिकी ।

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वन विभाग सीमा स्तंभों को हटाकर पीछे हटाया जा रहा है ।

भारत लीक्स ,आगरा। यमुना पार में केवल झरना नाले के समीप स्थित जंगल में खुलेआम पर्यावरण कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार यहां न सिर्फ घने जंगल को काटा जा रहा है, बल्कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर उसकी प्लाटिंग तक की जा रही है। यह सब कुछ वन विभाग की नाक के नीचे, बल्कि कथित मिलीभगत से हो रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में सक्रिय भूमाफिया पहले मोटी–मोटी लकड़ियों को कटवाते हैं। इसके बाद जेसीबी मशीनों से जमीन समतल कर प्लाट काटे जा रहे हैं, जिन्हें आगे बेचने की तैयारी है। जिन लोगों को जमीन पर कब्जा कराया जा रहा है, वे खुलेआम निर्माण की कोशिशों में जुटे हैं।

वन विभाग अपनी जमीन को भूमाफिया को दे रहा है उसके बाद वहां पर लगे सीमा स्तंभों को हटा कर पीछे लगता जा रहा है । यह अपने आप में एक बड़ी बात है कि विभाग  सरकार की जमीन क्यों बेच रहा है । क्या उसे मोटा धन कमाने की अभिलाषा है अगर यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब वन विभाग अपनी सारी जमीन पर कब्जा  देगा ।


इस अवैध गतिविधि को लेकर कई बार शिकायतें दी जा चुकी हैं। मौके पर सर्वे भी हुए, मीडिया ने भी बार-बार खबरें प्रकाशित कीं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हुई। हालात यह हैं कि आज भी सैकड़ों लोग कुल्हाड़ी लेकर जंगल क्षेत्र में पहुंचे और जेसीबी चलती नजर आई।

चार दिन पहले इसी इलाके की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिनमें मोटी लकड़ियों के कटे हुए ठूंठ साफ दिखाई दे रहे थे। ये दृश्य अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करते हैं कि आखिर किसके संरक्षण में सरकारी जंगल को उजाड़ा जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के स्पष्ट और सख्त आदेशों के बावजूद इस तरह की गतिविधियां जारी रहना प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो झरना नाले के समीप स्थित यह जंगल पूरी तरह खत्म हो जाएगा। लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, भूमाफियाओं और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो और अवैध कब्जों को तुरंत हटाकर सरकारी वन भूमि को सुरक्षित किया जाए।

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