यमुना किनारे गांधी स्मारक पर बापू की यादें हुई धुंधली l
✍🏻 आशीष लोधी, भारत लीक्स, आगरा
भारत लीक्स,आगरा। यह वही स्थान है जहां महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में प्रवास किया था। 11 सितम्बर 1929 को गांधी जी आगरा आए और ट्रांस-यमुना इलाके की लालाजी की कोठी (वर्तमान गांधी स्मारक) में ठहरे। यहां लगभग 10 दिन रहकर उन्होंने शहर की जनता को संबोधित किया, जनसभाओं के माध्यम से युवाओं, महिलाओं और छात्रों को आज़ादी की लड़ाई में शामिल होने की प्रेरणा दी। गांधी जी ने पालीवाल पार्क (तब हेविट पार्क) में जनसभा की और खादी, स्वदेशी व नशा-निषेध का संदेश दिया। 20 सितम्बर 1929 को वह आगरा से आगे की यात्रा पर रवाना हो गए।
गांधी जी का यह प्रवास खास इसलिए भी माना जाता है क्योंकि वह यमुना तट पर स्थित इस स्मारक में रातों को ध्यान और चिंतन में लीन हो जाते थे। नदी की कल-कल ध्वनि और पेड़ों की सरसराहट के बीच बापू घंटों बैठकर सत्य, अहिंसा और स्वराज्य के मार्ग पर मनन करते थे। यह स्थान उनके लिए शांति और साधना का केंद्र बन गया था।

लेकिन आज इस स्मारक की हालत बेहद दयनीय है। गांधी जी की प्रतिमा खंडित हो चुकी है, उनका चश्मा वर्षों से टूटा हुआ पड़ा है। देखरेख के अभाव में स्मारक पर वीरानी और उपेक्षा छा गई है। जिस स्थान से कभी सत्य और अहिंसा की गूंज उठती थी, वहां आज सन्नाटा पसरा है।
हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के नेता श्याम अग्रवाल ‘बॉबी भाई’ ने इस स्मारक की सुध ली। उन्होंने यहां शांति पाठ कराया और दीवारों पर पेंटिंग कराकर माहौल को सजाया-संवारा। उनकी कोशिशों से स्मारक को थोड़ी नई पहचान मिली है, लेकिन यह सवाल अब भी खड़ा है कि क्या केवल व्यक्तिगत प्रयासों से गांधी स्मारक की गरिमा वापस लौटेगी?
इतिहासकार मानते हैं कि यह जिम्मेदारी सरकार और समाज दोनों की है। यदि समय रहते इस स्मारक को नहीं संवारा गया तो आने वाली पीढ़ियां उस स्थान से अनजान रह जाएंगी, जहां महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता का बीज बोया था।
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✍🏻 आशीष लोधी
भारत लीक्स, आगरा
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