काल्पनिक फ़ोटो नेट से ली गई ।

बूथों में डटे शिक्षक, घरों में इंतजार करती रहीं पूजा की थालियां ।

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होली की शुभकामनाएं… या जख्म पर नमक?
भारत लीक्स ,आगरा।  रंगों के त्योहार होली पर जहां एक ओर घरों में पूजा की तैयारी चल रही थी, वहीं दूसरी ओर सरकारी शिक्षक एसआईआर के कार्य में बूथों पर डटे रहे। 2 मार्च को होली के दिन भी उन्हें न छुट्टी मिली और न ही घर जाने की अनुमति।
सूत्रों के अनुसार थाना एत्मादपुर क्षेत्र में कई सरकारी अध्यापक सुबह से ही फील्ड और बूथों पर तैनात रहे। जीपीएस लोकेशन ट्रैक की जा रही थी और सख्त निगरानी में काम कराया जा रहा था।
घरों में अधूरी रही होली । कई शिक्षकों के परिवारों में पूजा नहीं हो सकी। बच्चों ने माता-पिता का इंतजार किया, फोन पर बार-बार पूछा — “पापा कब आएंगे?”
कुछ घरों में बच्चे और महिलाएं भूखे बैठे रहे ताकि परिवार के मुखिया के साथ ही पूजा हो सके, लेकिन ड्यूटी की मजबूरी के आगे त्योहार फीका पड़ गया।
व्हाट्सएप पर शुभकामनाएं, मैदान में ड्यूटी
विडंबना यह रही कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में होली की शुभकामनाएं दी जाती रहीं, जबकि शिक्षक बूथों पर बैठकर सरकारी कार्य कर रहे थे।
कई शिक्षकों ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए जवाब में लिखा कि
“जब त्योहार पर परिवार के साथ नहीं हैं, तो इन शुभकामनाओं का क्या अर्थ?”
उनका कहना है कि शुभकामनाएं तभी सार्थक होती हैं जब कर्मचारी अपने घर, परिवार और बच्चों के साथ त्योहार मना सके।
आहत हुए शिक्षक
शिक्षकों का कहना है कि वे सरकारी जिम्मेदारी निभाने से पीछे नहीं हटते, लेकिन त्योहार जैसे पारिवारिक अवसर पर भी राहत न मिलना मन को आहत करता है।
एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा —
“सरकारी आदेश सर्वोपरि है, लेकिन त्योहार पर बच्चों की आंखों में इंतजार देखकर दिल टूट जाता है।”
सवाल व्यवस्था पर
त्योहार के दिन भी लगातार ड्यूटी और सख्त निगरानी ने शिक्षकों में नाराजगी पैदा कर दी है।
अब सवाल उठ रहा है कि क्या त्योहारों पर ड्यूटी के लिए कोई मानवीय दृष्टिकोण नहीं अपनाया जा सकता?
(सूत्रों के आधार पर तैयार रिपोर्ट)

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