नगर निगम की जमीन पर अवैध कब्जा ।
10–15 हजार में बन रहीं समाधियां; प्रशासन की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल ।
भारत लीक्स, आगरा l यमुना नदी के किनारे स्ट्रेचिंग ब्रिज के नीचे स्थित काली मां का भव्य मंदिर इन दिनों विवादों के केंद्र में है। मामला नगर निगम की जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे और वहां चल रहे ‘समाधि कारोबार’ से जुड़ा है, जिसने न केवल सरकारी भूमि की सुरक्षा बल्कि धार्मिक पवित्रता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदिर के आसपास की भूमि नगर निगम की बताई जाती है, जिसे विभिन्न विकास योजनाओं के लिए सुरक्षित रखा गया है। इसके बावजूद, उक्त स्थान पर कुछ स्थानीय युवक इस जमीन का दुरुपयोग करते हुए बाहरी लोगों से 10,000 से 15,000 रुपये तक लेकर अवैध रूप से ‘समाधियां’ बनवा रहे हैं। धीरे-धीरे यह क्षेत्र समाधियों की कतार में तब्दील होता जा रहा है।
धार्मिक पवित्रता पर भी सवाल l
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि काली मां मंदिर के ठीक समीप बड़ी संख्या में समाधियां बना दी गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के बगल में इस प्रकार समाधियों का निर्माण धार्मिक मान्यताओं के विपरीत है और इससे मंदिर की पवित्रता प्रभावित हो रही है। कई लोगों ने इसे धार्मिक रूप से ‘खंडित स्थिति’ बताया है।
प्रशासन की भूमिका संदिग्ध ।
इस पूरे मामले में नगर निगम, राजस्व विभाग और प्रशासन की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। नगर आयुक्त और जिलाधिकारी (DM) सहित संबंधित अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने से कई तरह के संदेह उत्पन्न हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

स्थानीय लोगों में आक्रोश ।
क्षेत्रीय नागरिकों में इस मुद्दे को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते अवैध कब्जों और निर्माण पर रोक नहीं लगाई गई, तो सरकारी जमीन पूरी तरह कब्जे में चली जाएगी और मंदिर की गरिमा भी प्रभावित होगी।
मांग ।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध समाधियों को हटाने, भूमि को कब्जा मुक्त कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
यमुना किनारे आस्था और व्यवस्था के बीच खड़ा यह मामला अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर कब और क्या कार्रवाई करते हैं।
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