RTE में फर्जी दाखिले का खेल सरकार के पैसे पर डाका ।
भारत लीक्स,आगरा । आगरा में शिक्षा का अधिकार (RTE) जैसी सरकारी योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें अभिभावकों की भूमिका गंभीर रूप से संदेह के घेरे में है। जांच में सामने आया है कि कुछ अभिभावकों ने पैसों के लालच में बच्चों के शैक्षणिक रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ कर योजना का गलत लाभ उठाने की कोशिश की।

पहले मामले में छात्र युग प्रताप सिंह का नाम सामने आया है, जिसने ओम पब्लिक स्कूल, आगरा से कक्षा-1 उत्तीर्ण की थी। इसके बावजूद अभिभावकों ने उसे दोबारा कक्षा-1 में दाखिला दिलाया और RTE allotment का लाभ लेने का प्रयास किया।
दूसरे मामले में छात्र रुद्र, सानवी, सोना निवासी शाहदरा के यह बच्चे है जो सीधे नर्सरी क्लास व एल के जी क्लास को पढ़ने के बाद ukg क्लास को छोड़कर सीधे सरकारी पैसे का गलत तरीके से लाभ लेने के कारण बच्चो को कक्षा 1 में प्रवेश दिल दिया है । चौंकाने वाली बात यह है कि बच्चे को अभी बुनियादी स्तर की पहचान (छोटा-बड़ा, बेसिक समझ) तक स्पष्ट नहीं है, इसके बावजूद उसे एल के जी व ukg क्लास छोड़कर सीधे कक्षा-1 में दाखिला दिला दिया गया। इससे स्कूलों में पढ़ाई के दौरान भी समस्या सामने आ रही है।

कैसे हुआ खेल:
पास छात्र को दोबारा कक्षा-1 में दाखिला
नर्सरी व एल के जी को छात्र को सीधे कक्षा-1 में चढ़ाया
बच्चों की उम्र और शैक्षणिक स्तर को नजरअंदाज किया गया
RTE आवंटन का गलत उपयोग ,दस्तावेजों में हेरफेर ।
गंभीर पहलू:
पैसों के लालच में अभिभावकों ने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। कई मामलों में बच्चों की पढ़ाई में 1 से 2 साल तक का अंतर (gap) पैदा कर दिया गया है। इससे न केवल बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि उनकी मानसिक और शैक्षणिक प्रगति पर भी असर पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, ऐसे सैकड़ों मामले सामने आने की आशंका है, जहां अभिभावक आर्थिक लाभ के लिए बच्चों के भविष्य से समझौता कर रहे हैं और साथ ही सरकारी धन का भी गलत लाभ उठा रहे हैं।
जांच में सहयोग नहीं कर रहे अभिभावक:
जब स्कूलों द्वारा दस्तावेजों की जांच शुरू की गई तो कई अभिभावक सामने नहीं आ रहे हैं।
फोन कॉल का जवाब नहीं दे रहे
जरूरी दस्तावेज जमा नहीं कर रहे
स्कूलों से संपर्क करने से बच रहे हैं
इससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
कानूनी पहलू:
यह कृत्य भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) के अंतर्गत आता है, जिसमें सख्त कार्रवाई और दंड का प्रावधान है।
📦 बॉक्स: allotment के बाद भी गायब अभिभावक
👉 नाम आने के बाद भी नहीं पहुंचे स्कूल
कई अभिभावकों के बच्चों का RTE में allotment हो चुका है । इसके बावजूद वे स्कूलों में संपर्क नहीं कर रहे
जरूरी दस्तावेज अब तक जमा नहीं ।
👉 बढ़ी प्रशासन की चिंता
इससे सीटें खाली रह सकती हैं और वास्तविक जरूरतमंद बच्चों को नुकसान हो सकता है ।
👉 सख्ती के संकेत
ऐसे अभिभावकों पर भी कार्रवाई की तैयारी।
निष्कर्ष:
RTE जैसी सरकारी योजना में इस तरह का फर्जीवाड़ा न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ भी गंभीर अन्याय है। इस पूरे मामले ने जिले में हड़कंप मचा दिया है और अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।
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